स्वीकारने में लाभ था और आज राघोजी के पीछे उनकी पत्नी द्वारा लिये गए दत्तक को नकारने में लाभ था। क्या लाभकारी था, यह मुख्य प्रश्न था और उसी के अनुसार सारी बातें तय होती थीं। दत्तक नहीं लिया, इसलिए सतारा का राज्य अधिगृहित किया तो लिया हुआ दत्तक वारिस नहीं होता, इसलिए सतारा का राज्य अधिगृहीत किया। अपने प्राण बचाने की वास्तविकता इच्छा हो तो तर्कशास्त्र के चक्कर में न पड़ें, यही उचित है!
नागपुर का राज्य अधिग्रहण कर डलहौजी ने 76,
स्वीकारने में लाभ था और आज राघोजी के पीछे उनकी पत्नी द्वारा लिये गए दत्तक को नकारने में लाभ था। क्या लाभकारी था, यह मुख्य प्रश्न था और उसी के अनुसार सारी बातें तय होती थीं। दत्तक नहीं लिया, इसलिए सतारा का राज्य अधिगृहित किया तो लिया हुआ दत्तक वारिस नहीं होता, इसलिए सतारा का राज्य अधिगृहीत किया। अपने प्राण बचाने की वास्तविकता इच्छा हो तो तर्कशास्त्र के चक्कर में न पड़ें, यही उचित है!
नागपुर का राज्य अधिग्रहण कर डलहौजी ने 76,