1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

की सोने-चांदी की वस्तुएं छीन-छीनकर नागपुर के बाजारों में बिकने के लिए रखी गई। राजपत्नी के कंठ में शोभित हार बाजार में धूल खाता पड़ा रहा। हाथी जहां सौ रूपए में बिका, उसी नीलामी में घोड़े की कीमत-जिस घोड़े को डलहौजी के घोड़े से अधिक मूल्यवान खुराक मिलती थी उस घोड़े की कीमत-बीस रूपये और दूसरा जोड़ा पांच रूपए में बिका, क्या आश्चर्य! हाथी और हाथी के हौदे, घोड़े और बैलों की पीठ की झूलें बेची गई। शरीर के सरे अलंकार


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की सोने-चांदी की वस्तुएं छीन-छीनकर नागपुर के बाजारों में बिकने के लिए रखी गई। राजपत्नी के कंठ में शोभित हार बाजार में धूल खाता पड़ा रहा। हाथी जहां सौ रूपए में बिका, उसी नीलामी में घोड़े की कीमत-जिस घोड़े को डलहौजी के घोड़े से अधिक मूल्यवान खुराक मिलती थी उस घोड़े की कीमत-बीस रूपये और दूसरा जोड़ा पांच रूपए में बिका, क्या आश्चर्य! हाथी और हाथी के हौदे, घोड़े और बैलों की पीठ की झूलें बेची गई। शरीर के सरे अलंकार


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