छिन जाने से रानियां निष्कांचन हो गई। फिर भी अंग्रेजों का स्नेह कम नहीं हुआ था। फिर राजभवन खोदा जाने लगा। स्वयं रनी के शयनकक्ष में फिरंगियों की कुदाल चली। पाठक! ठहरें, इतनी जल्दी शरीर में सिहरन मत आनें दें, क्योंकि यह खुदाई अभी तो आगे भी चलेगी। देखिए, वह रानी के शयनकक्ष के पलंग को तोड-फोड़कर भूमि खोदने लगा। और यह कब? जब बराबर के कक्ष में राजपत्नी अन्नपूर्णाबाई जीवन के अंतिम क्षण गिन रही थी। नागपुर के
छिन जाने से रानियां निष्कांचन हो गई। फिर भी अंग्रेजों का स्नेह कम नहीं हुआ था। फिर राजभवन खोदा जाने लगा। स्वयं रनी के शयनकक्ष में फिरंगियों की कुदाल चली। पाठक! ठहरें, इतनी जल्दी शरीर में सिहरन मत आनें दें, क्योंकि यह खुदाई अभी तो आगे भी चलेगी। देखिए, वह रानी के शयनकक्ष के पलंग को तोड-फोड़कर भूमि खोदने लगा। और यह कब? जब बराबर के कक्ष में राजपत्नी अन्नपूर्णाबाई जीवन के अंतिम क्षण गिन रही थी। नागपुर के