1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

मरे। बालाजी विश्वनाथ जिस गद्दी का पहला पेशवा था उस गद्दी का अंतिम पेशवा श्रीमंत नाना साहब था, यह अभिमानपूर्वक इतिहास को कहा जा सके, इसलिए हे राजतेजयुक्त बालक! तू महाराष्ट्र की पेशवाई गद्दी पर चिरकाल विराजमान हो।

इसी समय श्री क्षेत्र काशी में मोरोपंत तांबे और उनकी सुशील पत्नी भागीरथी चिमणाजी अप्प साहब पेशवा के आश्रय में रहते थे। इस दंपती को अपना नाम इतिहास में अजर-अमर होनेवाला था, लेकिन हिंदुस्थान


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मरे। बालाजी विश्वनाथ जिस गद्दी का पहला पेशवा था उस गद्दी का अंतिम पेशवा श्रीमंत नाना साहब था, यह अभिमानपूर्वक इतिहास को कहा जा सके, इसलिए हे राजतेजयुक्त बालक! तू महाराष्ट्र की पेशवाई गद्दी पर चिरकाल विराजमान हो।

इसी समय श्री क्षेत्र काशी में मोरोपंत तांबे और उनकी सुशील पत्नी भागीरथी चिमणाजी अप्प साहब पेशवा के आश्रय में रहते थे। इस दंपती को अपना नाम इतिहास में अजर-अमर होनेवाला था, लेकिन हिंदुस्थान


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