1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लोगों को न अद्वितीय बच्चों का भावी दिव्यत्व नहीं दिखा और अब जब वह दिव्यत्व उन्हें दिखता है, तब उनकी वह भूतकालीन बाल लीलाएं नहीं दिखती। लेकिन मनुष्य के चर्मचक्षु की वह अदूरदृष्टि दूर करने को यदि कल्पना का चश्मा मिले तो भूतकाल की वह बाललीला हम सहज ही देख सकेंगे। श्रीमंत नाना साहब और उनके बंधु राव साहब जब अपने शिक्षक के पास विद्याभ्यास कर रहे थे तब यह तेजस्विनी छबीली भी अटक-अटककर पढ़ना सीख रही थी। हाथी


211 of 2102

लोगों को न अद्वितीय बच्चों का भावी दिव्यत्व नहीं दिखा और अब जब वह दिव्यत्व उन्हें दिखता है, तब उनकी वह भूतकालीन बाल लीलाएं नहीं दिखती। लेकिन मनुष्य के चर्मचक्षु की वह अदूरदृष्टि दूर करने को यदि कल्पना का चश्मा मिले तो भूतकाल की वह बाललीला हम सहज ही देख सकेंगे। श्रीमंत नाना साहब और उनके बंधु राव साहब जब अपने शिक्षक के पास विद्याभ्यास कर रहे थे तब यह तेजस्विनी छबीली भी अटक-अटककर पढ़ना सीख रही थी। हाथी


211 of 2102