के हौदे में नाना साहब बैठे हैं और दूसरे पर बैठकर यह मूर्त लक्ष्मी कब आती है, इसकी प्रतीक्षा में लगाम खींचे खड़े हैं-तभी कमर में तलवार लटकी हुई, वायु के कोमल झोंके से जिसके घुंघराले केश किंचित् मात्र हिल रहे हैं और जिसकी गौर तनु उन्मत्त घोड़े को नियंत्रण में रखने के श्रम से गुलाबी हो गई है-ऐसी छबीली अपने घोड़े पर साथ आते ही दोनों ही दौड़ते निकल जाते हैं। नाना की आयु लगभग अठारह और छबीली का सात वर्ष के आसपास
के हौदे में नाना साहब बैठे हैं और दूसरे पर बैठकर यह मूर्त लक्ष्मी कब आती है, इसकी प्रतीक्षा में लगाम खींचे खड़े हैं-तभी कमर में तलवार लटकी हुई, वायु के कोमल झोंके से जिसके घुंघराले केश किंचित् मात्र हिल रहे हैं और जिसकी गौर तनु उन्मत्त घोड़े को नियंत्रण में रखने के श्रम से गुलाबी हो गई है-ऐसी छबीली अपने घोड़े पर साथ आते ही दोनों ही दौड़ते निकल जाते हैं। नाना की आयु लगभग अठारह और छबीली का सात वर्ष के आसपास