थी। सातवें वर्ष से भावी धर्मयुद्ध के इन दो प्रमुख योद्धाओं की कवायद प्रारंभ हुई, यह कितनी मनोरम बात है! इन दो मानवी रत्नों का तब से एक-दूसरे पर बहुत प्रेम था।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 55
इन दो भाई-बहनों की यम द्वितीया के दिन भाईदूज होती थी। सुंदर, सतेज, मनोहरी छबीली हाथ में सोने का दीप लेकर उस तरूण राजकुमार की आरती उतारती थी।
सन् 1542 में छबीली का झांसी के महाराज गंगाधर राव साहब से विवाह हुआ
थी। सातवें वर्ष से भावी धर्मयुद्ध के इन दो प्रमुख योद्धाओं की कवायद प्रारंभ हुई, यह कितनी मनोरम बात है! इन दो मानवी रत्नों का तब से एक-दूसरे पर बहुत प्रेम था।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 55
इन दो भाई-बहनों की यम द्वितीया के दिन भाईदूज होती थी। सुंदर, सतेज, मनोहरी छबीली हाथ में सोने का दीप लेकर उस तरूण राजकुमार की आरती उतारती थी।
सन् 1542 में छबीली का झांसी के महाराज गंगाधर राव साहब से विवाह हुआ