ऐसा यदि कंपनी कहती है तो इस तर्क का सारे इतिहास में उदाहरण मिलना कठिन होगा। यह पंेशन जो दी गई वह समझौते की शर्त के रूप में दी गईं उस समझौते में बाजीराव उस पंेशन को किस तरह व्यय करें, उस शर्त में क्या यह भी तय किया गया था? एि हुए राज्य के लिए यह पेंशन मिलती है। उसे कैसे व्यय करना है, यह कहने का इस जगत् में किसी को तनिक भी अधिकार नहीं है। इतना ही नहीं अपितु श्रीमंत बाजीराव इस पंेशन की सारी-की-सारी राशि
ऐसा यदि कंपनी कहती है तो इस तर्क का सारे इतिहास में उदाहरण मिलना कठिन होगा। यह पंेशन जो दी गई वह समझौते की शर्त के रूप में दी गईं उस समझौते में बाजीराव उस पंेशन को किस तरह व्यय करें, उस शर्त में क्या यह भी तय किया गया था? एि हुए राज्य के लिए यह पेंशन मिलती है। उसे कैसे व्यय करना है, यह कहने का इस जगत् में किसी को तनिक भी अधिकार नहीं है। इतना ही नहीं अपितु श्रीमंत बाजीराव इस पंेशन की सारी-की-सारी राशि