के लिए दिया हुआ राज्य हमेषा आपके पास कैसे रहेगा? उस समझौते की एक षर्त तो तोड़ी जाए और दूसरी बनी रहे, यह अनुचित है।’’ बाद में ऐसा जो कहा जा रहा था कि आप दत्तक पुत्र हैं, इसलिए आपका हक नहीं बनता, उसके संबंध में साफ-साफ और तर्कसंगत निवेदन करने के बाद श्रीमंत नाना साहब कहते हैं-‘‘श्रीमंत बाजीराव साहब
1857 का स्वातंत्र्य समर - 56
ने अपनी पंेशन में मिव्ययिता से कुछ राशि बचाई, इसलिए अब पंेशन चालू रखने का कोई कारण नहीं है,
के लिए दिया हुआ राज्य हमेषा आपके पास कैसे रहेगा? उस समझौते की एक षर्त तो तोड़ी जाए और दूसरी बनी रहे, यह अनुचित है।’’ बाद में ऐसा जो कहा जा रहा था कि आप दत्तक पुत्र हैं, इसलिए आपका हक नहीं बनता, उसके संबंध में साफ-साफ और तर्कसंगत निवेदन करने के बाद श्रीमंत नाना साहब कहते हैं-‘‘श्रीमंत बाजीराव साहब
1857 का स्वातंत्र्य समर - 56
ने अपनी पंेशन में मिव्ययिता से कुछ राशि बचाई, इसलिए अब पंेशन चालू रखने का कोई कारण नहीं है,