1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

राजमहलों में दिखनेवाली सब प्रकार की कमनीयता श्रीमंत के उस दीवानखाने में दिखती थी। घोड़ों और ऊंटों के सारे उढ़ावन चांदी के होते थे। श्रीमंत को घोड़ों का बहुत शोक था और उत्तर हिंदुस्थान में उनकी अश्वविद्या की बड़ी धूम थी। उनकी घुड़सवार उत्तम और होशियार घोड़ों से हमेशा भरी रहती थी। अलग-अलग जाति के हिरन, शिकारी घोड़ों से हमेशा भरी रहती थी। अलग-अलग जाति के हिरन, शिकारी कुत्ते, सांभर, ऊंट एवं हिंदुस्थान के सब तरह


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राजमहलों में दिखनेवाली सब प्रकार की कमनीयता श्रीमंत के उस दीवानखाने में दिखती थी। घोड़ों और ऊंटों के सारे उढ़ावन चांदी के होते थे। श्रीमंत को घोड़ों का बहुत शोक था और उत्तर हिंदुस्थान में उनकी अश्वविद्या की बड़ी धूम थी। उनकी घुड़सवार उत्तम और होशियार घोड़ों से हमेशा भरी रहती थी। अलग-अलग जाति के हिरन, शिकारी घोड़ों से हमेशा भरी रहती थी। अलग-अलग जाति के हिरन, शिकारी कुत्ते, सांभर, ऊंट एवं हिंदुस्थान के सब तरह


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