के जानवर पालने में उनकी बहुत रूचि थी। परंतु इन सब वस्तुओं की तुलना में श्रीमंत का शस्त्रागार बहुत उत्तम था। उसमें अलग-अलग तरह के शस्त्र, तेज धारवाली तलवारें, एकदम नई बंदूकें और सब तरह की तोपें बहुत थी। श्रीमंत स्वभाव से स्वाभिमानी थे। हम एक बड़े राजवंश के अंगभूत हैं और उस महान् और प्रथित वंश को सोहे, ऐसा जीवन की सकें तो जीना है, अन्यथा पूरी तरह नामशेष हो जाता ही अच्छा, यह उनका निश्चय था। अपने आभिजात्य
के जानवर पालने में उनकी बहुत रूचि थी। परंतु इन सब वस्तुओं की तुलना में श्रीमंत का शस्त्रागार बहुत उत्तम था। उसमें अलग-अलग तरह के शस्त्र, तेज धारवाली तलवारें, एकदम नई बंदूकें और सब तरह की तोपें बहुत थी। श्रीमंत स्वभाव से स्वाभिमानी थे। हम एक बड़े राजवंश के अंगभूत हैं और उस महान् और प्रथित वंश को सोहे, ऐसा जीवन की सकें तो जीना है, अन्यथा पूरी तरह नामशेष हो जाता ही अच्छा, यह उनका निश्चय था। अपने आभिजात्य