1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

स्तर की गालियों की बौछार शुरू हो गई। ऐसे इन कोतवाल को डांटनेवाले कृतघ्न चोरों से ही हिंदुस्थान में अंगे्रजी का इतिहास भरा है। श्रीमंत नाना साहब एक विद्याचार-संपन्न व्यक्ति थे। उन्हें विश्व की राजनीति में बहुत रूचि थी और उसके लिए वे बहुत से प्रमुख अंगे्रजी पत्र खरीदते थे। हर रोज दैनिक पत्र आते ही महाराज वह सब पढ़वा लेते थे। इस काम के लिए मि. टाॅड नामक एक अंगे्रज नियुक्त था। वे प्रोफेसर भी कानपुर के कत्लेआम


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स्तर की गालियों की बौछार शुरू हो गई। ऐसे इन कोतवाल को डांटनेवाले कृतघ्न चोरों से ही हिंदुस्थान में अंगे्रजी का इतिहास भरा है। श्रीमंत नाना साहब एक विद्याचार-संपन्न व्यक्ति थे। उन्हें विश्व की राजनीति में बहुत रूचि थी और उसके लिए वे बहुत से प्रमुख अंगे्रजी पत्र खरीदते थे। हर रोज दैनिक पत्र आते ही महाराज वह सब पढ़वा लेते थे। इस काम के लिए मि. टाॅड नामक एक अंगे्रज नियुक्त था। वे प्रोफेसर भी कानपुर के कत्लेआम


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