उदारता से व्यवहार करते थे। श्रीमंत नाना अपनी उदारता के कारण उस समय के अंगे्रजों के बहुत प्यारे हो गए थे, यह बात ध्यान में रखनी चाहिए। श्रीमंत नाना के आतिथ्य-
1857 का स्वातंत्र्य समर - 59
सात्कार का जब तक आनंद ले रहे थे तब तक अंगे्रज अधिकारियों और मैडमों के वे गले का हार बने हुए थे। परंतु कानपुर के रण-मैदान में स्वराज्य के लिए और स्वधर्म के लिए उनके द्वारा तलवार उठाए जाते ही उनपर दुःशब्दों और निन्म
उदारता से व्यवहार करते थे। श्रीमंत नाना अपनी उदारता के कारण उस समय के अंगे्रजों के बहुत प्यारे हो गए थे, यह बात ध्यान में रखनी चाहिए। श्रीमंत नाना के आतिथ्य-
1857 का स्वातंत्र्य समर - 59
सात्कार का जब तक आनंद ले रहे थे तब तक अंगे्रज अधिकारियों और मैडमों के वे गले का हार बने हुए थे। परंतु कानपुर के रण-मैदान में स्वराज्य के लिए और स्वधर्म के लिए उनके द्वारा तलवार उठाए जाते ही उनपर दुःशब्दों और निन्म