ने जब से अंगे्रजों से रिष्ते बनाए तब से उसके राज्य का एक-एक टुकड़ा अंगे्रजों की ओर जाने लगा था। सन् 1801 में एक समझौता वजीर के सिर पर जबरन लादा गया, उसमें यह अपहरण की इच्छा पूरी निर्लज्जता से प्रदर्शित की गई थी। नवाब वजीर उस समय पहले से ही कंपनी की सहयोगी सेना के लिए प्रतिवर्ष 75 लाख रूपये दे रहा था। कंपनी की इस डकैती से नवाब का खजाना कठिनाई में आ गया थां पर अंगे्रजों ने जबरन यह मांग की कि नवाब अपनी
ने जब से अंगे्रजों से रिष्ते बनाए तब से उसके राज्य का एक-एक टुकड़ा अंगे्रजों की ओर जाने लगा था। सन् 1801 में एक समझौता वजीर के सिर पर जबरन लादा गया, उसमें यह अपहरण की इच्छा पूरी निर्लज्जता से प्रदर्शित की गई थी। नवाब वजीर उस समय पहले से ही कंपनी की सहयोगी सेना के लिए प्रतिवर्ष 75 लाख रूपये दे रहा था। कंपनी की इस डकैती से नवाब का खजाना कठिनाई में आ गया थां पर अंगे्रजों ने जबरन यह मांग की कि नवाब अपनी