1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अपने प्रदेश की व्यवस्था से प्रजा को सुखकर करे और हर काम में वह कंपनी के अधिकारियों से सलाह-मशवरा करे।’’ अब यह प्रजा को सुखकर व्यवस्था कैसे रखनी है। यदि नवाब कोई सुधार करने की इच्छा करे तो उसकी इच्छा के विरूद्ध कंपनी उस पर गुर्राए। फिर भी आग्रह था कि प्रजा के लिए सुखकर व्यवस्था की जाए । नवाब का खजाना बार-बार डकैती डालकर खाली किया जाता और उस पर नई मांग भी रखी जाती और इस डकैती की पूर्ति के लिए जब नवाब


256 of 2102

अपने प्रदेश की व्यवस्था से प्रजा को सुखकर करे और हर काम में वह कंपनी के अधिकारियों से सलाह-मशवरा करे।’’ अब यह प्रजा को सुखकर व्यवस्था कैसे रखनी है। यदि नवाब कोई सुधार करने की इच्छा करे तो उसकी इच्छा के विरूद्ध कंपनी उस पर गुर्राए। फिर भी आग्रह था कि प्रजा के लिए सुखकर व्यवस्था की जाए । नवाब का खजाना बार-बार डकैती डालकर खाली किया जाता और उस पर नई मांग भी रखी जाती और इस डकैती की पूर्ति के लिए जब नवाब


256 of 2102