अपने प्रदेश की व्यवस्था से प्रजा को सुखकर करे और हर काम में वह कंपनी के अधिकारियों से सलाह-मशवरा करे।’’ अब यह प्रजा को सुखकर व्यवस्था कैसे रखनी है। यदि नवाब कोई सुधार करने की इच्छा करे तो उसकी इच्छा के विरूद्ध कंपनी उस पर गुर्राए। फिर भी आग्रह था कि प्रजा के लिए सुखकर व्यवस्था की जाए । नवाब का खजाना बार-बार डकैती डालकर खाली किया जाता और उस पर नई मांग भी रखी जाती और इस डकैती की पूर्ति के लिए जब नवाब
अपने प्रदेश की व्यवस्था से प्रजा को सुखकर करे और हर काम में वह कंपनी के अधिकारियों से सलाह-मशवरा करे।’’ अब यह प्रजा को सुखकर व्यवस्था कैसे रखनी है। यदि नवाब कोई सुधार करने की इच्छा करे तो उसकी इच्छा के विरूद्ध कंपनी उस पर गुर्राए। फिर भी आग्रह था कि प्रजा के लिए सुखकर व्यवस्था की जाए । नवाब का खजाना बार-बार डकैती डालकर खाली किया जाता और उस पर नई मांग भी रखी जाती और इस डकैती की पूर्ति के लिए जब नवाब