1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



एक ओर नवाबांे और जनता को राज्य व्यवस्था सुखकर करना पूरी तरह असंभव बनाकर देसरी ओर कंपनी कहती कि राज्य व्यवस्था सुखकर करनी ही होगी। यह स्थिति कुछ ऐसी ही थी कि कोई अत्याचारी बाप बच्चे को जोर से पीटता जाए और कहे-चुप रह, खबरदार जो रोएगा तो! इसमें फर्क इतना ही है कि वह बाप ऐसा मूर्खतापूर्ण कार्य कम-से-कम सद्हेतु से तो करता है! परंतु कंपनी नवाब का मुंह बांधकर जो पिटाई कर रही थी वह तो केवल उसका गला दबाकर


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एक ओर नवाबांे और जनता को राज्य व्यवस्था सुखकर करना पूरी तरह असंभव बनाकर देसरी ओर कंपनी कहती कि राज्य व्यवस्था सुखकर करनी ही होगी। यह स्थिति कुछ ऐसी ही थी कि कोई अत्याचारी बाप बच्चे को जोर से पीटता जाए और कहे-चुप रह, खबरदार जो रोएगा तो! इसमें फर्क इतना ही है कि वह बाप ऐसा मूर्खतापूर्ण कार्य कम-से-कम सद्हेतु से तो करता है! परंतु कंपनी नवाब का मुंह बांधकर जो पिटाई कर रही थी वह तो केवल उसका गला दबाकर


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