प्राण लेने के लिए ही थी। यह प्राणघात जितनी जल्दी और जितनी सुलभता से हो, करने के लिये अंगे्रजों ने हजारों अड़चनें और हजारों तिकड़में भिड़ाई-उन सबका वर्णन स्थानाभाव के कारण संभव नहीं। फिर भी उदाहरण के लिए एक अत्यंत नीच तिकड़म दिए बिना रहा नहीं जाता। वह तिकड़म थी, सन् 1837 में लाॅर्ड आॅकलैंड द्वारा नवाब से किया हुआ समझौता कुछ ही वर्षों बाद साफतौर पर अस्वीकार करना। यह समझौता होते ही इंग्लैंड उसे भूल गया हो,
प्राण लेने के लिए ही थी। यह प्राणघात जितनी जल्दी और जितनी सुलभता से हो, करने के लिये अंगे्रजों ने हजारों अड़चनें और हजारों तिकड़में भिड़ाई-उन सबका वर्णन स्थानाभाव के कारण संभव नहीं। फिर भी उदाहरण के लिए एक अत्यंत नीच तिकड़म दिए बिना रहा नहीं जाता। वह तिकड़म थी, सन् 1837 में लाॅर्ड आॅकलैंड द्वारा नवाब से किया हुआ समझौता कुछ ही वर्षों बाद साफतौर पर अस्वीकार करना। यह समझौता होते ही इंग्लैंड उसे भूल गया हो,