ने सवाल उठाया कि यदि वह पुस्तक माराठी भाशा में है तो बंबई, मध्य प्रांत व राजपुताना सर्किल के डाकखानों में ही उसे रोका जा सकेगा; क्योंकि अन्य प्रांतों में मराठीभाषी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। 2 जनवरी 1909 को एक नया सवाल खड़ा हो गया कि अगर वह मराठी पुस्तक जर्मनी से छपकर भारत आ रही है तो उसे समुद्री डाक में ही रोकना होगा; पर काफी सोच-विचार के बाद पोस्ट आॅफिस ऐक्अ के अंतर्गत ही पुस्तक पर
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प्रतिबंध
ने सवाल उठाया कि यदि वह पुस्तक माराठी भाशा में है तो बंबई, मध्य प्रांत व राजपुताना सर्किल के डाकखानों में ही उसे रोका जा सकेगा; क्योंकि अन्य प्रांतों में मराठीभाषी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। 2 जनवरी 1909 को एक नया सवाल खड़ा हो गया कि अगर वह मराठी पुस्तक जर्मनी से छपकर भारत आ रही है तो उसे समुद्री डाक में ही रोकना होगा; पर काफी सोच-विचार के बाद पोस्ट आॅफिस ऐक्अ के अंतर्गत ही पुस्तक पर
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