लगाने का निर्णय लिया गया; क्यांेकि समुद्र कस्टम्स ऐक्ट के अंतर्गत लिये गए किसी भी निर्णय को इंग्लैंड व यूरोप में भी प्रचारित करना पड़ता, जिससे वहां के भारतीय क्रांतिकारी सतर्क हो जाते हैं।
20 जुलाई, 1909 को घबराई हुई बंबई सरकार ने भारत सरकार को तार भेजा कि इस पुस्तक के वितरण को रोकना अत्याधिक महत्त्वपूर्ण है और वह पुस्तक किसी भी क्षण भारी मात्रा में भारत पहुंच सकती है। अतः हम भारत सरकार से विनम्रतापूर्वक
लगाने का निर्णय लिया गया; क्यांेकि समुद्र कस्टम्स ऐक्ट के अंतर्गत लिये गए किसी भी निर्णय को इंग्लैंड व यूरोप में भी प्रचारित करना पड़ता, जिससे वहां के भारतीय क्रांतिकारी सतर्क हो जाते हैं।
20 जुलाई, 1909 को घबराई हुई बंबई सरकार ने भारत सरकार को तार भेजा कि इस पुस्तक के वितरण को रोकना अत्याधिक महत्त्वपूर्ण है और वह पुस्तक किसी भी क्षण भारी मात्रा में भारत पहुंच सकती है। अतः हम भारत सरकार से विनम्रतापूर्वक