के राजमहलों से भी उन्हें बहुत सारी जानकारी मिल गई होती और घोड़ियों का पातिव्रत्य भंग करने से भी बड़े व्रतों को भंग करनेवालों की जिंदगी और राज्य अधिग्रहण कर लेने तथा स्वयं के घर के छेद भरने में वे अपने समय का अधिक उपयोग कर सकते थे।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 67
प्रकरण-5
धकेलो उसमें
अब इच्छित राष्ट्रकार्य की तिथि पास आती जा रही है, अतः ऐसे समय इष्ट सिद्धि के लिए कुल् देवताओं की कृपा प्राप्त करनी
के राजमहलों से भी उन्हें बहुत सारी जानकारी मिल गई होती और घोड़ियों का पातिव्रत्य भंग करने से भी बड़े व्रतों को भंग करनेवालों की जिंदगी और राज्य अधिग्रहण कर लेने तथा स्वयं के घर के छेद भरने में वे अपने समय का अधिक उपयोग कर सकते थे।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 67
प्रकरण-5
धकेलो उसमें
अब इच्छित राष्ट्रकार्य की तिथि पास आती जा रही है, अतः ऐसे समय इष्ट सिद्धि के लिए कुल् देवताओं की कृपा प्राप्त करनी