1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ही चाहिए। इस प्रचंड राष्ट्र-विक्षोभ के कुलदेव की प्रसन्नता ही प्रतिशोध है। इसे प्रसन्न किए बनिा और अपनी सहायता के लिए आने को बाध्य करने के सिवाए सन् 1857 में लिये गए संकल्प की सिद्धि नहीं होगी। इसलिए हवनकुंड को प्रदीप्त करो और उसमें इतनी दिव्य हवन सामग्री डालो कि मुख्य कुलदेव चैतन्य होकर प्रकट हो ही जाएं। इंद्रजित् के प्रचंड यज्ञ से अजेय रथा बाहर निकलने तक जैसे हवनों का धूम-धड़ाका उड़ाया गया वैसे ही


272 of 2102

ही चाहिए। इस प्रचंड राष्ट्र-विक्षोभ के कुलदेव की प्रसन्नता ही प्रतिशोध है। इसे प्रसन्न किए बनिा और अपनी सहायता के लिए आने को बाध्य करने के सिवाए सन् 1857 में लिये गए संकल्प की सिद्धि नहीं होगी। इसलिए हवनकुंड को प्रदीप्त करो और उसमें इतनी दिव्य हवन सामग्री डालो कि मुख्य कुलदेव चैतन्य होकर प्रकट हो ही जाएं। इंद्रजित् के प्रचंड यज्ञ से अजेय रथा बाहर निकलने तक जैसे हवनों का धूम-धड़ाका उड़ाया गया वैसे ही


272 of 2102