1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पैदल रेजीमंेट का एक कमांडर बड़े घमंड से कहता है-‘‘मैं गत बीस वर्षों से यह शुभ चरित का कार्य निरंतर कर रहा हूं। इन काफिर लोगों की आत्मा को शैतान से बचाना एक फौजी कर्तव्य ही है।’’ हिंदुस्थान कके धन पर मोटे हुए ये पादरी वीर एक हाथ में लश्करी आदेशों की पुस्तक और दूसरे हाथ में बाइबिल लेकर इस देश के सिपाहियों को धर्मच्युत करने का प्रयास दिन-रात करते रहते थे। इतना ही नहीं अपितु उस प्रयास में जल्दी सफलता मिले,


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पैदल रेजीमंेट का एक कमांडर बड़े घमंड से कहता है-‘‘मैं गत बीस वर्षों से यह शुभ चरित का कार्य निरंतर कर रहा हूं। इन काफिर लोगों की आत्मा को शैतान से बचाना एक फौजी कर्तव्य ही है।’’ हिंदुस्थान कके धन पर मोटे हुए ये पादरी वीर एक हाथ में लश्करी आदेशों की पुस्तक और दूसरे हाथ में बाइबिल लेकर इस देश के सिपाहियों को धर्मच्युत करने का प्रयास दिन-रात करते रहते थे। इतना ही नहीं अपितु उस प्रयास में जल्दी सफलता मिले,


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