छपकर देश-विदेश में वितरीत होते रहे। उस पुस्तक को छिपाकर भारत में लाना एक साहसपूर्ण क्रांति-कर्म बन गया। वह देशभक्त क्रांतिकारियों की ‘गीता’ बन गई। उसकी अलभ्य प्रति को कहीं से खोज पाना सौभाग्य माना जाता था। उसकी एक-एक प्रति गुप्त रूप से एक हाथ से दूसरे हाथ होती हुई अनेक अंतःकरणों में क्रांति की ज्वाला सुलगा जाती थी।
इतिहास की इस क्रंातिकारी पुस्तक का इतिहास आरंभ होता है सन् 1906 से, जब क्रांति-मंत्र
छपकर देश-विदेश में वितरीत होते रहे। उस पुस्तक को छिपाकर भारत में लाना एक साहसपूर्ण क्रांति-कर्म बन गया। वह देशभक्त क्रांतिकारियों की ‘गीता’ बन गई। उसकी अलभ्य प्रति को कहीं से खोज पाना सौभाग्य माना जाता था। उसकी एक-एक प्रति गुप्त रूप से एक हाथ से दूसरे हाथ होती हुई अनेक अंतःकरणों में क्रांति की ज्वाला सुलगा जाती थी।
इतिहास की इस क्रंातिकारी पुस्तक का इतिहास आरंभ होता है सन् 1906 से, जब क्रांति-मंत्र