हे हिंदुस्थान! धर्म रक्षण यदि आवश्यक हो, धर्म के उद्देश्य के लिए मानव का जो प्रगमन आवश्यक है उसे साधने का यदि तेरा हेतु हो और यदि अपमान पर तुझे लज्जा आती है तो इस गुलामी को भंग करने को तैयार हो जा। धर्म के लिए मर, मरते-मरते सबको मार और मारते-मारते स्वराज्य प्राप्त कर। सन् 1857 का वर्ष उदय हो चुका है, इसलिए उठ! और स्वराज्य प्राप्त कर!
1857 का स्वातंत्र्य समर - 77
प्रकरण-7
गुप्त संगठन
जैसाकि पिछले अध्याय में वर्णन किया गया है,
हे हिंदुस्थान! धर्म रक्षण यदि आवश्यक हो, धर्म के उद्देश्य के लिए मानव का जो प्रगमन आवश्यक है उसे साधने का यदि तेरा हेतु हो और यदि अपमान पर तुझे लज्जा आती है तो इस गुलामी को भंग करने को तैयार हो जा। धर्म के लिए मर, मरते-मरते सबको मार और मारते-मारते स्वराज्य प्राप्त कर। सन् 1857 का वर्ष उदय हो चुका है, इसलिए उठ! और स्वराज्य प्राप्त कर!
1857 का स्वातंत्र्य समर - 77
प्रकरण-7
गुप्त संगठन
जैसाकि पिछले अध्याय में वर्णन किया गया है,