1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पंडित एवं राजनीतिक संन्यासी सारे हिंदुस्थान भर में गुप्त रीति से विचरने लगे। दासता और गुलामी के प्रति गुस्सा उत्पन्न करते हुए यह दास्य नामशेष करना कितना सुलभ है, हिंदुस्थान के हृदय में हिंदुस्तान की तलवार ही कैसे धंसाई जा रही है और हिंदुस्तानी लोग स्वदेश के लिए मर मिटने के लिए तैयार हो जाएं तो एक क्षण में उन्हेें अपना देश फिरंगियों के चुंगल से मुक्त करना कितना सरल है-यह सब राजा से रंक तक हर भारतीय


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पंडित एवं राजनीतिक संन्यासी सारे हिंदुस्थान भर में गुप्त रीति से विचरने लगे। दासता और गुलामी के प्रति गुस्सा उत्पन्न करते हुए यह दास्य नामशेष करना कितना सुलभ है, हिंदुस्थान के हृदय में हिंदुस्तान की तलवार ही कैसे धंसाई जा रही है और हिंदुस्तानी लोग स्वदेश के लिए मर मिटने के लिए तैयार हो जाएं तो एक क्षण में उन्हेें अपना देश फिरंगियों के चुंगल से मुक्त करना कितना सरल है-यह सब राजा से रंक तक हर भारतीय


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