1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सारी राजधानियों मंे नाना के दूत और उनके पत्र सारे हिंदुस्थान को स्वतंत्रता युद्व के लिए उइने की चेतना देते हुए घूम रहे थे। अंगे्रजी सत्ता के नीचे स्वराज्य और स्वधर्म की कैसी छीछालेदर होती जा रही है; जो रियासतें आज जीवित हैं, वे भी कल किस तरह नामशेष होनेवाली हैं तथा अंगे्रजों की विश्वासघाती गुलामी में अपने प्राणप्रिय हिंदुस्थान की कैसी बरबादी हो रही है-यह सब स्पष्ट और मार्मिक रीति से जनता के मन में भरते हुए मौलवी,


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सारी राजधानियों मंे नाना के दूत और उनके पत्र सारे हिंदुस्थान को स्वतंत्रता युद्व के लिए उइने की चेतना देते हुए घूम रहे थे। अंगे्रजी सत्ता के नीचे स्वराज्य और स्वधर्म की कैसी छीछालेदर होती जा रही है; जो रियासतें आज जीवित हैं, वे भी कल किस तरह नामशेष होनेवाली हैं तथा अंगे्रजों की विश्वासघाती गुलामी में अपने प्राणप्रिय हिंदुस्थान की कैसी बरबादी हो रही है-यह सब स्पष्ट और मार्मिक रीति से जनता के मन में भरते हुए मौलवी,


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