1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

भर लोगों को तलवार के एक झटके में गारद कर सकते हैं। कलकत्ते से पेशावर तक मैदान साफ है।’’

श्रीमंत नाना साहब के स्वयं के हस्ताक्षर के पत्रों ने और ब्रह्यवर्त से भेजे गए संन्यासियों ने ऐसी उदात्त आत्मनिष्ठा के बीज भारतीय मन में बो दिए। परंतु आज उपलब्ध जानकारी से ऐसा दिखता है कि अवध का राज्य अधिगृहित होने तक इन बीजों मंे जोरदार अंकुर नहीं फूटे थे।

सन् 1856 में अवध का राज्य अधिगृहीत होते ही अकस्मात्


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भर लोगों को तलवार के एक झटके में गारद कर सकते हैं। कलकत्ते से पेशावर तक मैदान साफ है।’’

श्रीमंत नाना साहब के स्वयं के हस्ताक्षर के पत्रों ने और ब्रह्यवर्त से भेजे गए संन्यासियों ने ऐसी उदात्त आत्मनिष्ठा के बीज भारतीय मन में बो दिए। परंतु आज उपलब्ध जानकारी से ऐसा दिखता है कि अवध का राज्य अधिगृहित होने तक इन बीजों मंे जोरदार अंकुर नहीं फूटे थे।

सन् 1856 में अवध का राज्य अधिगृहीत होते ही अकस्मात्


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