1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

धूर्त लोगों को भी सन् 1857 में तोपों की गड़गड़ाहट होने तक उसकी रत्ती भर भनक नहीं थी। हजारों रूपयों की तनख्याह और हाथियों का पुरस्कार देकर इस राजनीतिक जिहाद का उपदेश करने के लिए बड़े-बड़े मौलवी भेजे गए। वे गांवों और शहरों में इस राजनीतिक धर्मयुद्ध का उपदेश गुप्त सभाओं में देते हुए घूमते थे। सिपाहियांे के शिविरों में रात को इनके व्याख्यान होते थे। लखनऊ की मस्जिदों में मौलवी जिहाद शुरू करने संबंधी खुले भाषण


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धूर्त लोगों को भी सन् 1857 में तोपों की गड़गड़ाहट होने तक उसकी रत्ती भर भनक नहीं थी। हजारों रूपयों की तनख्याह और हाथियों का पुरस्कार देकर इस राजनीतिक जिहाद का उपदेश करने के लिए बड़े-बड़े मौलवी भेजे गए। वे गांवों और शहरों में इस राजनीतिक धर्मयुद्ध का उपदेश गुप्त सभाओं में देते हुए घूमते थे। सिपाहियांे के शिविरों में रात को इनके व्याख्यान होते थे। लखनऊ की मस्जिदों में मौलवी जिहाद शुरू करने संबंधी खुले भाषण


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