राष्ट्रीय अभिलेखागार में सुरक्षित सरकारी फाइलों से उपलब्ध वायसराय स्तर तक की इन उच्च-स्तरीय टिप्पणियों से स्पष्ट होता है कि 6 नवंबर, 1908 से 23 जुलाई, 1909 तक पूरे नौ महीने ब्रिटिश गुप्तचर विभाग एवं भारत सरकार जी-तोड़ कोशिश करके भी पुस्तक की भाषा, शीर्षक, मुद्रण स्थान एवं उस प्रकाशित लेखक के नाम के बारे में सही जानकारी नहीं पा सके और अंधेरे में ही तीर चलाते रहे। प्रकाशन के पूर्व ही किसी पुस्तक पर
राष्ट्रीय अभिलेखागार में सुरक्षित सरकारी फाइलों से उपलब्ध वायसराय स्तर तक की इन उच्च-स्तरीय टिप्पणियों से स्पष्ट होता है कि 6 नवंबर, 1908 से 23 जुलाई, 1909 तक पूरे नौ महीने ब्रिटिश गुप्तचर विभाग एवं भारत सरकार जी-तोड़ कोशिश करके भी पुस्तक की भाषा, शीर्षक, मुद्रण स्थान एवं उस प्रकाशित लेखक के नाम के बारे में सही जानकारी नहीं पा सके और अंधेरे में ही तीर चलाते रहे। प्रकाशन के पूर्व ही किसी पुस्तक पर