यह मनःक्रांति संपादित करने के लिए मन की ओर जो भी रास्ते जाते हैं उन सारे रास्तों का क्रांति की चैकियां स्थापित करनी चाहिए। मानव मन सहज ही उत्सवप्रिय होता है, अतः सामान्य जनसमूह को वश में करने के लिए उत्सव के अतिरिक्त दूसरा राजमार्ग नहीं दिखता। इन उत्सवों को शक्कर में घोलकर सिद्वातों की गोली दी जाए तो समाज का बालमन उसे रूचि से गटक लेता है ओर उससे रोग भी ठीक हो जाते हैं। ऐसे गहरे विचार से उस गुप्त
यह मनःक्रांति संपादित करने के लिए मन की ओर जो भी रास्ते जाते हैं उन सारे रास्तों का क्रांति की चैकियां स्थापित करनी चाहिए। मानव मन सहज ही उत्सवप्रिय होता है, अतः सामान्य जनसमूह को वश में करने के लिए उत्सव के अतिरिक्त दूसरा राजमार्ग नहीं दिखता। इन उत्सवों को शक्कर में घोलकर सिद्वातों की गोली दी जाए तो समाज का बालमन उसे रूचि से गटक लेता है ओर उससे रोग भी ठीक हो जाते हैं। ऐसे गहरे विचार से उस गुप्त