1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के कान में वही आक्रोश भयंकर रूप से गंूज रहा था।

विस्तीर्ण रचना के साधन भी विस्तीर्ण ही होते हैं। जर्जर हुई मातृभूमि को मदोन्मत्त अत्याचारों के हाथ से छुड़ाने जैसा कार्य करने के लिए पहली मूलभूत एवं


1857 का स्वातंत्र्य समर - 84

महत्त्वपूर्ण कोई बात है तो वह है सब लोगों का मनःप्रवर्तन। वस्तुस्थिति के क्रांति करनी हो तो सबसे पहले मनःस्थिति पर विजय पानी चाहिए। यह मनःक्रांति की चैकियां स्थापित करनी चाहिए।


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के कान में वही आक्रोश भयंकर रूप से गंूज रहा था।

विस्तीर्ण रचना के साधन भी विस्तीर्ण ही होते हैं। जर्जर हुई मातृभूमि को मदोन्मत्त अत्याचारों के हाथ से छुड़ाने जैसा कार्य करने के लिए पहली मूलभूत एवं


1857 का स्वातंत्र्य समर - 84

महत्त्वपूर्ण कोई बात है तो वह है सब लोगों का मनःप्रवर्तन। वस्तुस्थिति के क्रांति करनी हो तो सबसे पहले मनःस्थिति पर विजय पानी चाहिए। यह मनःक्रांति की चैकियां स्थापित करनी चाहिए।


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