1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जो वीर वृत्ति जागृत कर पाना कठिन था उस वीर वृत्ति का संचार इन लड़ाके सैनिकों में उस निर्वाक् कमल पुष्प ने अपने रक्तिम वर्णीय संकेत से किया।

कमल पुष्प! शुचि, यश और प्रकाश का कविजनों का मान्य काव्य प्रतीक! और उसका वर्ण? रक्तोज्जवल ! रक्तोज्जवल!! उस पुष्प में स्पर्श मात्र से हृदय पुष्प विकसित हो उठे, इतना वह मृदुचेतन! सैकड़ों सिपाहियों द्वारा जब वह कमल पुष्प इस हाथ से उस हाथ मंे दिया गया होगा तब उस पुष्प


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जो वीर वृत्ति जागृत कर पाना कठिन था उस वीर वृत्ति का संचार इन लड़ाके सैनिकों में उस निर्वाक् कमल पुष्प ने अपने रक्तिम वर्णीय संकेत से किया।

कमल पुष्प! शुचि, यश और प्रकाश का कविजनों का मान्य काव्य प्रतीक! और उसका वर्ण? रक्तोज्जवल ! रक्तोज्जवल!! उस पुष्प में स्पर्श मात्र से हृदय पुष्प विकसित हो उठे, इतना वह मृदुचेतन! सैकड़ों सिपाहियों द्वारा जब वह कमल पुष्प इस हाथ से उस हाथ मंे दिया गया होगा तब उस पुष्प


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