तीर की तरह आगे बढ़ता और रास्ते में दूसरी टुकड़ी मिलते ही उसके मुखिया के हाथ में वह रक्त कमल दे देता। इस रीति से कमल काव्य में पूर्ण हुआ संगठन क्रांति के एक ही रक्तमय विचार से भर जाता। यह रक्त कमल मानों क्रांति की अंतिम राजमुद्रा ही थी। इस रक्त कमल को स्पर्श करते ही सिपाहियों के मन में किन भावनाओं का उछाल आता, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। वस्तुतः किसी महान् वक्ता को अपने अतुल्य शब्दों से श्रोताओं में
तीर की तरह आगे बढ़ता और रास्ते में दूसरी टुकड़ी मिलते ही उसके मुखिया के हाथ में वह रक्त कमल दे देता। इस रीति से कमल काव्य में पूर्ण हुआ संगठन क्रांति के एक ही रक्तमय विचार से भर जाता। यह रक्त कमल मानों क्रांति की अंतिम राजमुद्रा ही थी। इस रक्त कमल को स्पर्श करते ही सिपाहियों के मन में किन भावनाओं का उछाल आता, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। वस्तुतः किसी महान् वक्ता को अपने अतुल्य शब्दों से श्रोताओं में