पत्र भी इसी रीति से लिखे होते थे। परंतु इस संगठन के नेताओं के पत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते थे, अतः उन्हें बहुत सावधानी से लिखा जाता। अधिकतर योजना एवं रचना प्रत्यक्ष व्यक्ति भेजकर ही निश्चित की जाती। परंतु पत्र भेजना ही हो तो अत्यंत अस्पष्ट भाषा में लिखे जाते थे। इतना ही नहीं अपितु ये अस्पष्ट पत्र पकड़े जाने पर कदाचित् मुश्किल हो जाएगी, इसलिए चतुर नेता लोग अपना सारा पत्राचार सांकेतिक भाषा में ही करते थे। कुछ बूंदों
पत्र भी इसी रीति से लिखे होते थे। परंतु इस संगठन के नेताओं के पत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते थे, अतः उन्हें बहुत सावधानी से लिखा जाता। अधिकतर योजना एवं रचना प्रत्यक्ष व्यक्ति भेजकर ही निश्चित की जाती। परंतु पत्र भेजना ही हो तो अत्यंत अस्पष्ट भाषा में लिखे जाते थे। इतना ही नहीं अपितु ये अस्पष्ट पत्र पकड़े जाने पर कदाचित् मुश्किल हो जाएगी, इसलिए चतुर नेता लोग अपना सारा पत्राचार सांकेतिक भाषा में ही करते थे। कुछ बूंदों