1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar




1857 का स्वातंत्र्य समर - 88

की और आंकड़ों की लिपि बनाकर उसका इस गुप्त संगठन में उपयोग किया जाता।1

परंतु इन संकेत चिह्यें और इन गुप्त पत्रों में भी जो राष्ट्रीय उद्बोध न दिया जा सका वह उद्बोध हिंदुस्थान की भविष्यवाणी ने दिया। भविष्य कथन मन के आगामी काल में होनेवाली कूद है। मन दिव्यत्व पर भविष्य का दिव्यत्व अवलंबित होता है। सन् 1857 में हिंदुस्थान का मन स्वतंत्रता के प्रकाश से दिव्य हो गया, इसलिए


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1857 का स्वातंत्र्य समर - 88

की और आंकड़ों की लिपि बनाकर उसका इस गुप्त संगठन में उपयोग किया जाता।1

परंतु इन संकेत चिह्यें और इन गुप्त पत्रों में भी जो राष्ट्रीय उद्बोध न दिया जा सका वह उद्बोध हिंदुस्थान की भविष्यवाणी ने दिया। भविष्य कथन मन के आगामी काल में होनेवाली कूद है। मन दिव्यत्व पर भविष्य का दिव्यत्व अवलंबित होता है। सन् 1857 में हिंदुस्थान का मन स्वतंत्रता के प्रकाश से दिव्य हो गया, इसलिए


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