लिए और मुख्य-मुख्य गुप्त संगठनों में एकवाक्यता लाने के लिए ब्रह्यवर्त के बाहर निकले। सन् 1857 के अपै्रल में श्रीमंत अपने साथ अपने भाई बाबा साहब और अपने मंत्री अजीमुल्ला खान को लेकर दिल्ली की ओर गए। दिल्ली के वातावरण में उस समय नाना ने क्या मंत्र पढ़े और दिल्ली के दीवाने-आम में बादशाह से नाना ने कया निजी बातें की, इसकी स्मृति केवल उस वातावरण और दीवाने-आम को ही होगी! अंगे्रज लोगों में से मोर्लड नाम का
लिए और मुख्य-मुख्य गुप्त संगठनों में एकवाक्यता लाने के लिए ब्रह्यवर्त के बाहर निकले। सन् 1857 के अपै्रल में श्रीमंत अपने साथ अपने भाई बाबा साहब और अपने मंत्री अजीमुल्ला खान को लेकर दिल्ली की ओर गए। दिल्ली के वातावरण में उस समय नाना ने क्या मंत्र पढ़े और दिल्ली के दीवाने-आम में बादशाह से नाना ने कया निजी बातें की, इसकी स्मृति केवल उस वातावरण और दीवाने-आम को ही होगी! अंगे्रज लोगों में से मोर्लड नाम का