की अपेक्षा स्वतंत्रता की रक्षा करनेवाले पुलिसवाले रूस की राज्य क्रांति में दिखते हैं, ऐसा नहीं, वे हिंदुस्थान की राज्य क्रांति में भी थे। उत्तरी हिंदुस्थान में जैसे यह गुप्त संगठन कुशलता से खड़ा हो गया था वैसे ही यदि दक्षिण में भी होता तो कैसी बहार आ जाती!
1857 का स्वातंत्र्य समर - 89
इस तरह इधर-उधर मन-प्रवर्तन की लहरें उठा देने के बाद श्री नाना साहब फिर सारे केंद्रों को भी सूत्रबद्ध कर डालने के
की अपेक्षा स्वतंत्रता की रक्षा करनेवाले पुलिसवाले रूस की राज्य क्रांति में दिखते हैं, ऐसा नहीं, वे हिंदुस्थान की राज्य क्रांति में भी थे। उत्तरी हिंदुस्थान में जैसे यह गुप्त संगठन कुशलता से खड़ा हो गया था वैसे ही यदि दक्षिण में भी होता तो कैसी बहार आ जाती!
1857 का स्वातंत्र्य समर - 89
इस तरह इधर-उधर मन-प्रवर्तन की लहरें उठा देने के बाद श्री नाना साहब फिर सारे केंद्रों को भी सूत्रबद्ध कर डालने के