यह स्पष्ट रीति से कुछ इतिहासकार डरते-डरते अब स्वीकार करते हैं।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 95
हिंदुस्थान जैसे विस्तीर्ण देष में राज्य क्रांति जैसे गंभीर काम को अंगे्रजों जैसे धूर्त अधिकारियों को हवा भी न लगने देते हुए इतनी गोपनीयता से संगठित करने का कार्य जिन्होंने किया उन श्रीमंत नाना साहब, मौलवी अहमद शाह, वजीर अली नक्की खान आदि नेताओं की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है। सिपाही, पुलिस, जमींदार, राजस्व अधिकारी,
यह स्पष्ट रीति से कुछ इतिहासकार डरते-डरते अब स्वीकार करते हैं।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 95
हिंदुस्थान जैसे विस्तीर्ण देष में राज्य क्रांति जैसे गंभीर काम को अंगे्रजों जैसे धूर्त अधिकारियों को हवा भी न लगने देते हुए इतनी गोपनीयता से संगठित करने का कार्य जिन्होंने किया उन श्रीमंत नाना साहब, मौलवी अहमद शाह, वजीर अली नक्की खान आदि नेताओं की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है। सिपाही, पुलिस, जमींदार, राजस्व अधिकारी,