का दौर-दौरा चलते हुए भी अंगे्रजों जैसे धूर्त राज्यकर्ताओं को उस विद्रोह की इतनी कम जानकारी मिल पाई थी कि प्रत्यक्ष विद्रोह होने के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अंगे्रजों के अनेक अधिकारियों को विद्रोह का प्रमुख कारण कारतूस ही लगता था। कारतूस कितना निमित्त मात्र कारण था, यह अब कहीं जाकर अंगे्रजी इतिहासकारों को ज्ञात होने लगा है और सन् 1857 के भयंकर युद्ध में स्वदेशाभिमान और स्वधर्माभिमान का पवित्र स्फुरण उन योद्धाओं में कैसे संचरित हुआ था,
का दौर-दौरा चलते हुए भी अंगे्रजों जैसे धूर्त राज्यकर्ताओं को उस विद्रोह की इतनी कम जानकारी मिल पाई थी कि प्रत्यक्ष विद्रोह होने के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अंगे्रजों के अनेक अधिकारियों को विद्रोह का प्रमुख कारण कारतूस ही लगता था। कारतूस कितना निमित्त मात्र कारण था, यह अब कहीं जाकर अंगे्रजी इतिहासकारों को ज्ञात होने लगा है और सन् 1857 के भयंकर युद्ध में स्वदेशाभिमान और स्वधर्माभिमान का पवित्र स्फुरण उन योद्धाओं में कैसे संचरित हुआ था,