हम ऊपर लिख चुके हैं कि सन् 1947 में प्रकाशित प्रथम अधिकृत संस्करण में श्री.जी.एम.जोशी द्वारा 11 जनवरी, 1947 की तिथि में लिखित प्राक्कथन के अनुसार वह संस्करण हाॅलैंड में छपा था, किंतु उसी संस्करण के प्रारंभ में छिपाने और ब्रिटिश सरकार को गुमराह करने के लिए जान-बुझकर इंग्लैंड में छापा गया? सत्य चाहे जो हो, ब्रिटिश सरकार की भरसक कोशिशों के बावजूद पुस्तक का अंगे्रजी संस्करण छप ही गया। उसका शीर्षक था-‘एक भारतीय राष्ट्रवाद’।
हम ऊपर लिख चुके हैं कि सन् 1947 में प्रकाशित प्रथम अधिकृत संस्करण में श्री.जी.एम.जोशी द्वारा 11 जनवरी, 1947 की तिथि में लिखित प्राक्कथन के अनुसार वह संस्करण हाॅलैंड में छपा था, किंतु उसी संस्करण के प्रारंभ में छिपाने और ब्रिटिश सरकार को गुमराह करने के लिए जान-बुझकर इंग्लैंड में छापा गया? सत्य चाहे जो हो, ब्रिटिश सरकार की भरसक कोशिशों के बावजूद पुस्तक का अंगे्रजी संस्करण छप ही गया। उसका शीर्षक था-‘एक भारतीय राष्ट्रवाद’।