1857 का स्वातंत्र्य समर - 96
अपने बंधुओं को अपनी आंखों से सामने दंडित किया जाएगा, यह सुनकर भी शांत रहनेवाला बैरकपुर नहीं था। वहां स्वतंत्रता की ज्योति हर तलवार में चलकने लग गई थी। परंतु इन सबसे अधिक मंगल पांडे की तलवार म्यान में अधीर हो रही थी। 19वीं पलटन की रतह ही 34वीं पलटन को भी समय आते ही कंपनी की नौकरी को लात मारकर निकल जाने की इच्छा थी। इसलिए 19वीं पलटन को कंपनी अपने आप ही निकाल रही है,
1857 का स्वातंत्र्य समर - 96
अपने बंधुओं को अपनी आंखों से सामने दंडित किया जाएगा, यह सुनकर भी शांत रहनेवाला बैरकपुर नहीं था। वहां स्वतंत्रता की ज्योति हर तलवार में चलकने लग गई थी। परंतु इन सबसे अधिक मंगल पांडे की तलवार म्यान में अधीर हो रही थी। 19वीं पलटन की रतह ही 34वीं पलटन को भी समय आते ही कंपनी की नौकरी को लात मारकर निकल जाने की इच्छा थी। इसलिए 19वीं पलटन को कंपनी अपने आप ही निकाल रही है,