1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पलटन में हो रही तलवारों की खनखनाहट से जल्दी ही गोरे अधिकारियों की समझ में आ गई। अब यह मानभंग चुपचाप पी जाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं था; क्योंकि उस सारे प्रदेश में ऐसी एक भी पलटन नहीं थी जो इस नेटिव सेना को नियंत्रण में रख सके। यह बाधा दूर करने के लिए मार्च के प्रारंभ में ब्रह्यदेश में स्थित फिरंगी पलटन कलकत्ता लाई गई और 19वीं पलटन को निःशस्त्र कर काम से हटाने का आदेश जारी हुआ। इस आदेश पर कार्यवाही बैरकपुर में की जाए, यह निश्चित किया गया।


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पलटन में हो रही तलवारों की खनखनाहट से जल्दी ही गोरे अधिकारियों की समझ में आ गई। अब यह मानभंग चुपचाप पी जाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं था; क्योंकि उस सारे प्रदेश में ऐसी एक भी पलटन नहीं थी जो इस नेटिव सेना को नियंत्रण में रख सके। यह बाधा दूर करने के लिए मार्च के प्रारंभ में ब्रह्यदेश में स्थित फिरंगी पलटन कलकत्ता लाई गई और 19वीं पलटन को निःशस्त्र कर काम से हटाने का आदेश जारी हुआ। इस आदेश पर कार्यवाही बैरकपुर में की जाए, यह निश्चित किया गया।


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