1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

यह बात मंगल पांडे के अंतरतम को असह्य पीड़ा देने लगी और अपनी रेजिमेंट उसी दिन विद्रोह करे, वह ऐसा आग्रह करने लगा। गुप्त समिति के नेता आज विद्रोह करने को अनुमति नहीं दे रहे हैं, ऐसा ज्ञात होते ही उस जवान का साहस रूकना दुष्कर हो गया। उसने लपककर अपनी बंदूक उठाई और ‘मर्द हो वो उठो’, ऐसी गर्जना करते हुए परेड मैदान में कूद पड़ा।‘‘अरे, अब पीछे क्यों रहते हो? भाइयांे, आओ, टूट पड़ो। तुम्हें तुम्हारे धर्म की सौगंध है-चलो,


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यह बात मंगल पांडे के अंतरतम को असह्य पीड़ा देने लगी और अपनी रेजिमेंट उसी दिन विद्रोह करे, वह ऐसा आग्रह करने लगा। गुप्त समिति के नेता आज विद्रोह करने को अनुमति नहीं दे रहे हैं, ऐसा ज्ञात होते ही उस जवान का साहस रूकना दुष्कर हो गया। उसने लपककर अपनी बंदूक उठाई और ‘मर्द हो वो उठो’, ऐसी गर्जना करते हुए परेड मैदान में कूद पड़ा।‘‘अरे, अब पीछे क्यों रहते हो? भाइयांे, आओ, टूट पड़ो। तुम्हें तुम्हारे धर्म की सौगंध है-चलो,


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