जाने की अपेक्षा मृत्यु को अपनाने का निष्चय किया और अपनी बंदूक अपने ही सीने की ओर कर ली और तत्काल उसकी पवित्र देह घायल होकर गिर गई। तुंरत उस घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया; और उस एक सिपाही ने जो बहादुरी दिखाई उससे लज्जित होकर सारे अंगे्रज अधिकारी अपने-अपने तंबू में चले गए। यह सन् 1987 के मार्च की 29 तारीख थी।
मंगल पांडे का कोर्ट मार्शल कर जांच-पड़ताल हुई। उस जांच में वह अन्य षड्यंत्रकारियों के नाम बताएं,
जाने की अपेक्षा मृत्यु को अपनाने का निष्चय किया और अपनी बंदूक अपने ही सीने की ओर कर ली और तत्काल उसकी पवित्र देह घायल होकर गिर गई। तुंरत उस घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया; और उस एक सिपाही ने जो बहादुरी दिखाई उससे लज्जित होकर सारे अंगे्रज अधिकारी अपने-अपने तंबू में चले गए। यह सन् 1987 के मार्च की 29 तारीख थी।
मंगल पांडे का कोर्ट मार्शल कर जांच-पड़ताल हुई। उस जांच में वह अन्य षड्यंत्रकारियों के नाम बताएं,