1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

फिर ऐसी गर्जना हुई और अंग्रजों के गाढ़े लाल रक्त के उस दृष्य के आगे अधिक न रूकते हुए वह कर्नल जनरल के बंगले की ओर भाग गया। इधर मंगल पांडे अपने रक्तरंजित हाथ उठाकर-‘‘मर्दों, बढ़ो!’’ ऐसी भयानक गर्जना करते हुए इधर-उधर घूम रहा था। जनरल हीर्से को यह समाचार मिलते ह ीवह कुछ और युरोपियन सैनिक लेकर मंगल पांडे की ओर दौड़ता आया। अब निष्चित ही षत्रु पकड़ लेगा, यह जान उस देषवीर मंगल पांडे ने फिरंगियों के हाथों पकड़े


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फिर ऐसी गर्जना हुई और अंग्रजों के गाढ़े लाल रक्त के उस दृष्य के आगे अधिक न रूकते हुए वह कर्नल जनरल के बंगले की ओर भाग गया। इधर मंगल पांडे अपने रक्तरंजित हाथ उठाकर-‘‘मर्दों, बढ़ो!’’ ऐसी भयानक गर्जना करते हुए इधर-उधर घूम रहा था। जनरल हीर्से को यह समाचार मिलते ह ीवह कुछ और युरोपियन सैनिक लेकर मंगल पांडे की ओर दौड़ता आया। अब निष्चित ही षत्रु पकड़ लेगा, यह जान उस देषवीर मंगल पांडे ने फिरंगियों के हाथों पकड़े


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