1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पर उसका चैतन्य सारे हिंदुस्थान में फैला हुआ है और जिस सिद्धांत के लिए मंगल पांडे मरा वह सिद्धांत चिरंजीवी हो गया है। मंगल पांडे ने सन् 1857 के क्रांतियुद्ध को अपना रक्त दिया, इतना ही नहीं अपितु उस क्रांति में जो-जो स्वदेष के और स्वधर्म के लिए लड़े उन सबको ‘पांडे’ उपाधि लगाने का प्रयत्न षुरू हो गया। और इसीलिए यह नाम हर माता अपनी संतान को साभिमान बताने लगी।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 99

प्रकरण-2


414 of 2102

पर उसका चैतन्य सारे हिंदुस्थान में फैला हुआ है और जिस सिद्धांत के लिए मंगल पांडे मरा वह सिद्धांत चिरंजीवी हो गया है। मंगल पांडे ने सन् 1857 के क्रांतियुद्ध को अपना रक्त दिया, इतना ही नहीं अपितु उस क्रांति में जो-जो स्वदेष के और स्वधर्म के लिए लड़े उन सबको ‘पांडे’ उपाधि लगाने का प्रयत्न षुरू हो गया। और इसीलिए यह नाम हर माता अपनी संतान को साभिमान बताने लगी।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 99

प्रकरण-2


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