से उस क्रांतियुद्ध का पहला षहीद स्वर्गवासी हो गया। जिसके रक्त से सन् 1857 की षहादत की नदी का उद्गम हुआ उस देषवीर, धर्मवीर मंगल पांडे का नाम हर एक के कंठ एवं हृदय में अक्षय बना रहना चाहिए। सन् 1857 में हिंदुस्थान के स्वतत्रंता बीज में अंकुर फोड़ने के लिए मंगल पांडे ने अपना उश्ण रक्त सबसे पहले अर्पित किया। उस स्वतत्रंता की फसल आगे-पीछे कभी लहलहा उठी तो उसके पहले नैवेद्य का अधिकारी मंगल पांडे है।
मंगल पांडे नहीं है,
से उस क्रांतियुद्ध का पहला षहीद स्वर्गवासी हो गया। जिसके रक्त से सन् 1857 की षहादत की नदी का उद्गम हुआ उस देषवीर, धर्मवीर मंगल पांडे का नाम हर एक के कंठ एवं हृदय में अक्षय बना रहना चाहिए। सन् 1857 में हिंदुस्थान के स्वतत्रंता बीज में अंकुर फोड़ने के लिए मंगल पांडे ने अपना उश्ण रक्त सबसे पहले अर्पित किया। उस स्वतत्रंता की फसल आगे-पीछे कभी लहलहा उठी तो उसके पहले नैवेद्य का अधिकारी मंगल पांडे है।
मंगल पांडे नहीं है,