1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

खुशी से लात मारी। अपने बूट और यूनिफार्म फाड़-फूड़कर फेंक दिए। उन सिपाहियों को अपने वेतन से सैनिक टोपियां लेनी पड़ती थी। अतः उसे उनकी निजी संपति मान कंपनी ने उन्हें छूट दी थी कि वे चाहें तो उसे ले जाएं । परंतु नदी में नहाकर बाहर आने के बाद फिर से गुलामी का चिहृ को स्पर्श किया तो। अब हिंदुस्थान को कोई दूसरा आकर टोपी पहनाए, वे दिन लद गए हैं। फेंक दो दासता की टोपियां। हजारों टोपियां आकाश में दिखने लगी। परंतु


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खुशी से लात मारी। अपने बूट और यूनिफार्म फाड़-फूड़कर फेंक दिए। उन सिपाहियों को अपने वेतन से सैनिक टोपियां लेनी पड़ती थी। अतः उसे उनकी निजी संपति मान कंपनी ने उन्हें छूट दी थी कि वे चाहें तो उसे ले जाएं । परंतु नदी में नहाकर बाहर आने के बाद फिर से गुलामी का चिहृ को स्पर्श किया तो। अब हिंदुस्थान को कोई दूसरा आकर टोपी पहनाए, वे दिन लद गए हैं। फेंक दो दासता की टोपियां। हजारों टोपियां आकाश में दिखने लगी। परंतु


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