गुरूत्वाकर्षण के जिद्दी स्वभाव के कारण वे फिर से हिंदुस्थान की भूमि पर ही गिरी। फिर से भू देवी को
1857 का स्वातंत्र्य समर - 100
दासता की छूत लगी। दोड़ो सिपाहियों, उन दास्य चिन्ह्यें को उन अंगे्रजी अधिकारियों के सामने फाड़कर और पैरों तले कुचलकर धूल में मिला दो। हजारों सिपाही उन दास्य-दूशित टोपियों को कुचलने लगे और बलहीन हुए अंगे्रज अधिकारी अपनी सत्ता का खुला अपमान करता यह भारतीय नृत्य देखते रहे।
गुरूत्वाकर्षण के जिद्दी स्वभाव के कारण वे फिर से हिंदुस्थान की भूमि पर ही गिरी। फिर से भू देवी को
1857 का स्वातंत्र्य समर - 100
दासता की छूत लगी। दोड़ो सिपाहियों, उन दास्य चिन्ह्यें को उन अंगे्रजी अधिकारियों के सामने फाड़कर और पैरों तले कुचलकर धूल में मिला दो। हजारों सिपाही उन दास्य-दूशित टोपियों को कुचलने लगे और बलहीन हुए अंगे्रज अधिकारी अपनी सत्ता का खुला अपमान करता यह भारतीय नृत्य देखते रहे।