1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अंबाला में एक भी देशद्रोही न मिला।इससे स्वयं कमांडर-इन-चीफ गऊ बन गया और सिपाहियों के गुप्त षड्यंत्र की स्तुति करते हुए उनपर गुस्सा करता रहा तो इसमें आश्चर्य की बात क्या थी! अब यह आग हिंदुस्थान में जगह-जगह आरंभ हो गई थी। अंतिम विशाल आग भड़काने के पहले इधर-उधर छोटी-बड़ी गड़बड़ शुरू हो गई थी। अंबाला की भांति वहां भी अधिकारियों और देशद्रोहियों के घर सुलगने लगे थे। दिनांक 31 मई को सारा हिंदुस्थान एक साथ सुलगा दिया जाए,


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अंबाला में एक भी देशद्रोही न मिला।इससे स्वयं कमांडर-इन-चीफ गऊ बन गया और सिपाहियों के गुप्त षड्यंत्र की स्तुति करते हुए उनपर गुस्सा करता रहा तो इसमें आश्चर्य की बात क्या थी! अब यह आग हिंदुस्थान में जगह-जगह आरंभ हो गई थी। अंतिम विशाल आग भड़काने के पहले इधर-उधर छोटी-बड़ी गड़बड़ शुरू हो गई थी। अंबाला की भांति वहां भी अधिकारियों और देशद्रोहियों के घर सुलगने लगे थे। दिनांक 31 मई को सारा हिंदुस्थान एक साथ सुलगा दिया जाए,


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